क्या आपके किचन के बर्तनों की भी होती है एक्सपायरी डेट? जानें कब फेंकना है प्रेशर कुकर और नॉन-स्टिक कड़ाही!

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किचन में हमारे पुराने और विश्वसनीय बर्तन अक्सर एक परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। सालों साथ रहने के बाद उनसे एक भावनात्मक जुड़ाव हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही प्यारा सा लगने वाला पुराना प्रेशर कुकर या नॉन-स्टिक पैन आपकी सेहत के लिए मुसीबत बन सकता है? जी हाँ, बिल्कुल खाने-पीने की चीज़ों की तरह, आपके बर्तनों की भी एक ‘एक्सपायरी डेट’ होती है! चलिए आज जानते हैं कि किस बर्तन को कब किचन से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।

1. नॉन-स्टिक बर्तन: कोटिंग का सफ़ाया होने तक!
नॉन-स्टिक बर्तनों का जादू तब तक ही अच्छा लगता है जब तक उनकी कोटिंग सही सलामत रहती है। अगर आपकी कड़ाही की नॉन-स्टिक परत उतरने लगी है और वह आपके पराठे में शामिल हो रही है, तो समझ जाइए कि इसकी रिटायरमेंट की घंटी बज चुकी है। इसे जल्द से जल्द बदल दें। एक अच्छी क्वालिटी का नॉन-स्टिक बर्तन भी आमतौर पर 1 से 2 साल से ज्यादा नहीं चलना चाहिए।

2. चाकू और पीलर: जब धार हो जाए भोथरी!
अगर आपका चाकू सब्जी काटने के बजाय उसे मसलने लगा है, तो यह संकेत है कि अब नया चाकू लाने का समय आ गया है। खराब धार वाला चाकू न सिर्फ सब्जियों को बर्बाद करता है, बल्कि आपकी उंगलियों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। चाकू और पीलर को 1-2 साल में बदल देना चाहिए, या फिर उनकी धार तेज कराते रहें।

3. एल्यूमिनियम के बर्तन: खट्टी चीजों का दुश्मन!
एल्यूमिनियम के बर्तन हल्के और सस्ते होते हैं, इसलिए हर घर में मिल जाते हैं। लेकिन यह धातु बहुत जल्दी रिएक्ट करती है। इसमें खट्टी चीजें (जैसे दही, टमाटर, नींबू) पकाने पर धातु के कण खाने में मिल सकते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हैं। इन बर्तनों को 4-5 साल से ज्यादा इस्तेमाल न करें।

4. प्रेशर कुकर: सीटी बंद होने का इंतज़ार न करें!
अगर आपके प्रेशर कुकर की सीटी की आवाज़ बदल गई है या उसका रबर गास्केट फटने लगा है, तो इंतज़ार न करें! एक पुराना और घिसा हुआ कुकर दुर्घटना का कारण बन सकता है। कुकर को 5 साल के अंदर बदल देना चाहिए और उसके रबर गास्केट को हर 6 महीने में जरूर चेंज करें।

5. स्पैटुला और प्लास्टिक के बोर्ड: बैक्टीरिया का घर न बनने दें!
प्लास्टिक के कटिंग बोर्ड और स्पैटुला पर चाकू के निशान पड़ने लगें, तो समझ जाएं कि अब ये बैक्टीरिया को आमंत्रण दे रहे हैं। इन छोटी-छोटी दरारों में कीटाणु छिप जाते हैं। इन्हें लगभग 1 साल में बदल देना चाहिए। चूंकि ये महंगे नहीं होते, इसलिए इन्हें बदलना आसान है।

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तो अब से किचन में सफाई के साथ-साथ बर्तनों की ‘उम्र’ पर भी नजर रखें। थोड़ी सी सजगता आपके परिवार की सेहत की बड़ी रक्षा करेगी!

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पाठकों के मन में सवाल (FAQs)

1. क्या बर्तनों की ‘एक्सपायरी डेट’ सच में होती है या यह सिर्फ एक सलाह है?

यह एक सुरक्षा सलाह है, न कि कोई कड़वा सच। बर्तन समय के साथ घिसते हैं, उनकी सतह खराब होती है और वे हानिकारक तत्व छोड़ने लगते हैं या बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। दिए गए समय सीमा एक सामान्य दिशा-निर्देश है ताकि आप सुरक्षित रह सकें।

2. क्या महंगे और ब्रांडेड बर्तन भी उतने ही समय में बदलने होते हैं?

अच्छी क्वालिटी के बर्तन थोड़े लंबे समय तक चल सकते हैं, लेकिन मूल सिद्धांत वही रहता है। भले ही बर्तन महंगा हो, लेकिन अगर उसकी नॉन-स्टिक कोटिंग उतर रही है या वह खराब हो गया है, तो उसे बदलना ही सही है। कीमत से ज्यादा उसकी हालत पर ध्यान दें।

3. क्या पुराने बर्तनों को रिसाइकल या दोबारा इस्तेमाल करने का कोई तरीका है?

जी हाँ! सेहत के लिए हानिकारक बर्तनों (जैसे उतरी हुई कोटिंग वाले) में खाना बनाना बंद कर दें, लेकिन आप उन्हें पौधों के गमले के रूप में, किचन में सामान रखने के लिए, या किसी DIY प्रोजेक्ट में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह आप उनका सदुपयोग भी कर सकते हैं।

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