200+ Satellites अब लगाएंगे धरती पर नजर! किसान से लेकर नेताओं तक, सबके काम आएगा ये डेटा

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अब तक आपने सिर्फ फिल्मों में देखा होगा कि कोई सुपरहीरो पलक झपकते ही पूरी दुनिया पर नजर रखता है। अब यह कल्पना हकीकत में तब्दील होने वाली है, और वो भी हमारे अपने देश से! भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) की दिग्गज कंपनी ESRI India ने हैदराबाद के स्पेस स्टार्ट-अप ध्रुव स्पेस के साथ हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद है दुनिया भर के 200 से ज्यादा उपग्रहों (Satellites) से मिलने वाले भूमि अवलोकन डेटा को आम लोगों के लिए आसान बनाना।

यानी अब शहर बसाने वाले प्लानर, आपदा से निपटने वाले अधिकारी और यहाँ तक कि किसान भी, आसमान से मिलने वाली इस सटीक जानकारी का फायदा उठा सकेंगे। आइए जानते हैं कैसे यह डेटा हमारी जिंदगी को आसान बनाएगा।

क्या है पूरी खबर?

ESRI India और ध्रुव स्पेस की यह साझेदारी एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। ध्रुव स्पेस अपनी ‘एस्ट्राव्यू’ नाम की कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी सर्विस को ESRI की शक्तिशाली ‘आर्कजीआईएस’ टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ेगा। इसका सीधा सा मतलब है कि अब उपग्रहों से मिलने वाला डेटा और इमेजें पहले से कहीं ज्यादा आसानी से और साफ तरीके से समझा जा सकेगा।

किन-किन क्षेत्रों को होगा फायदा?

इस साझेदारी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अंतरिक्ष से मिलने वाला डेटा अब सिर्फ वैज्ञानिकों तक ही सीमित नहीं रहेगा। इससे कई क्षेत्रों में क्रांति आने की उम्मीद है:

  • शहरी नियोजन (Urban Planning): अब नगर निगम वाले बेहतर तरीके से शहर का प्लान बना सकेंगे। नई सड़कों, पार्कों और बिल्डिंग्स के लिए जमीन का चुनाव करना पहले से आसान हो जाएगा।
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management): बाढ़, भूकंप या तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में यह डेटा वरदान साबित होगा। खतरे वाले इलाकों का पहले ही पता लगाकर जान-माल का नुकसान कम किया जा सकेगा।
  • कृषि (Agriculture): किसान अब उपग्रहों की नजर से अपनी फसलों की सेहत देख सकेंगे! यह डेटा उन्हें बताएगा कि किस हिस्से में पानी की कमी है, कहाँ खाद डालनी है, जिससे उपज बढ़ेगी।
  • बुनियादी ढाँचे का विकास (Infrastructure Development): सड़कों, पुलों और नई परियोजनाओं के निर्माण में भी यह डेटा बेहद उपयोगी साबित होगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

ईएसआरआई इंडिया के प्रबंध निदेशक अगेंद्र कुमार ने कहा कि यह साझेदारी अंतरिक्ष-आधारित डेटा के इस्तेमाल को नई गति देगी। वहीं, ध्रुव स्पेस के सह-संस्थापक कृष्णा तेजा पेनामाकुरु ने बताया कि इस एकीकरण से जीआईएस डेटा को समझना और उसका विश्लेषण करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।

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सीधे शब्दों में कहें तो, अब आसमान की नजर हम सबकी मदद के लिए तैयार है! यह टेक्नोलॉजी न केवल हमारे शहरों को समझदार बनाएगी, बल्कि आपदाओं से लड़ने और खेती को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।


पाठकों के सवाल (FAQs)

1. क्या आम लोग भी इस सैटेलाइट डेटा का उपयोग कर सकते हैं?

जी बिल्कुल! इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि उपग्रहों से मिलने वाला डेटा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों तक सीमित न रहकर आम उपयोगकर्ताओं तक पहुँचे। ESRI की user-friendly technology की मदद से यह डेटा आसानी से समझा और इस्तेमाल किया जा सकेगा।

2. एक किसान इस डेटा का具体 उपयोग कैसे कर सकता है?

एक किसान इस डेटा का उपयोग अपने खेत की ‘हेल्थ मॉनिटरिंग’ के लिए कर सकता है। उपग्रह इमेजरी से उसे पता चल सकेगा कि उसकी फसल के किस हिस्से में पानी की कमी है (stress detection), कहाँ कीटों का प्रकोप है, या मिट्टी की सेहत कैसी है। इससे वह सही जगह पर सही संसाधनों का इस्तेमाल करके अपनी पैदावार बढ़ा सकता है।

3. आपदा प्रबंधन में यह डेटा कैसे मददगार होगा?

आपदा प्रबंधन में यह डेटा दो तरह से काम आएगा। पहला, आपदा से पहले: खतरे वाले इलाकों की पहचान करके और बचाव तैयारियों को मजबूत करने में। दूसरा, आपदा के दौरान और बाद में: बाढ़ या भूकंप जैसी स्थिति में क्षति का real-time आकलन करने और राहत कार्यों को सही दिशा देने में। इससे बचाव दलों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक तेजी से पहुँचने में मदद मिलेगी।

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