शहरों की जहरीली हवा से अपने फेफड़ों को बचाने की मास्टरक्लास: LNJP के डॉक्टर ने बताई जबरदस्त तरकीबें!

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भाई साहब, दिल्ली-एनसीआर की हवा में तो अब ऑक्सीजन के नाम पर सिर्फ नमूना मिलता है! ऐसे में अपने फेफड़ों का ख्याल रखना सीधे-सीधे अपनी जिंदगी से प्यार करने जैसा है। ये लंग्स यानी फेफड़े, हमारे शरीर का सबसे वफादार नौकर है जो बिना छुट्टी लिए हर सेकंड ऑक्सीजन की सप्लाई करता रहता है। लेकिन जब इस वफादार नौकर पर प्रदूषण रूपी दुश्मन हमला बोल दे, तो क्या करें? इसी सवाल का जवाब लेकर आए हैं लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल, दिल्ली के पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख, डॉ. नरेश कुमार।

फेफड़े: जिंदगी का जरिया

डॉ. कुमार की मानें तो फेफड़े हमारे लिए जीवनदायी ऑक्सीजन को खून तक पहुंचाने और खून से जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने का काम करते हैं। ये महानुभाव एक मिनट में लगभग 12 से 20 बार ये काम इतनी खामोशी से करते हैं कि हमें खबर तक नहीं होती! अगर ये थोड़ा भी आलस करने लगें, तो सीधा असर हमारी सांसों पर पड़ता है। इसलिए, इनकी सुरक्षा करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

फेफड़ों के दुश्मन कौन हैं?

डॉ. नरेश कुमार के मुताबिक, फेफड़ों को निशाना बनाने वाला कोई एक गुंडा नहीं, बल्कि पूरी की पूरी गैंग है! स्मोकिंग तो गैंग लीडर है ही, लेकिन प्रदूषण में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, 2.5 पीएम जैसे सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों की दीवार को तोड़कर अंदर घुस जाते हैं। यहीं से शुरुआत होती है तबाही की। ये खलनायक सिर्फ फेफड़ों तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि खून के जरिए दिल, दिमाग और किडनी जैसे अंगों को भी निशाना बनाते हैं। और हां, सिर्फ बाहर का प्रदूषण ही काफी नहीं, घर के अंदर की धूल, कुकिंग गैस, केमिकल वाले स्प्रे और पेंट की गंध भी फेफड़ों को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

प्रदूषण से फेफड़ों को क्या होता है?

जब ये जहरीले कण फेफड़ों में घुसते हैं, तो वहां सूजन पैदा कर देते हैं। इससे सांस लेने वाली छोटी-छोटी नलियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें ऑक्सीजन भरने की क्षमता घटने लगती है। नतीजा? खांसी, बलगम, सांस लेने में तकलीफ और छाती में भारीपन। यानी, अगर आपको लगता है कि सिर्फ खांसी आ रही है, तो समझ जाइए कि आपके फेफड़े एसओएस सिग्नल भेज रहे हैं!

डॉक्टर साहब के जबरदस्त टिप्स: फेफड़ों को रखें चुस्त-दुरुस्त

डॉ. कुमार कहते हैं कि सबसे पहले तो ये समझें कि खतरा सिर्फ बाहर नहीं, घर के अंदर भी मंडरा रहा है। इसलिए इन बातों का रखें खास ख्याल:

  1. घर की हवा को बनाएं ताजा: घर की खिड़कियां रोज खोलें ताकि ताजी हवा आ-जा सके। धूल को जमा न होने दें, विशेषकर कार्पेट और पर्दों पर।
  2. मास्क है बेस्ट फ्रेंड: बाहर प्रदूषण अधिक हो तो मास्क पहनना न भूलें। यह आपका सबसे भरोसेमंद बॉडीगार्ड है।
  3. एक्सरसाइज है जरूरी: रोजाना व्यायाम करें। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।
  4. स्मोकिंग से तौबा: सिगरेट-बीड़ी से पूरी तरह दूरी बना लें। याद रखें, परिवार के सामने धूम्रपान करना उन्हें भी ‘पैसिव स्मोकिंग’ के जरिए नुकसान पहुंचाना है।
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फेफड़ों को मजबूत बनाने वाली डाइट

मजबूत फेफड़ों के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। डॉ. कुमार के अनुसार संतुलित आहार सबसे जरूरी है। अपनी थाली में रंग-बिरंगी और ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और ड्राई फ्रूट्स शामिल करें। इससे इम्यूनिटी मजबूत होगी और फेफड़ों को सीधा फायदा मिलेगा।

तो ये थे कुछ आसान उपाय, जिन्हें अपनाकर आप शहर की जहरीली हवा में भी अपने फेफड़ों को हंसते-खेलते रख सकते हैं!


3 SEO-Friendly FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. क्या घर के अंदर का वायु प्रदूषण भी फेफड़ों के लिए उतना ही हानिकारक है?

जी बिल्कुल! बाहर के प्रदूषण पर चर्चा तो खूब होती है, लेकिन इंडोर एयर पॉल्यूशन एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है। घर में जमा धूल, कुकिंग से निकलने वाला धुआं, सफाई के केमिकल और पेंट की महक में मौजूद हानिकारक तत्व फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए घर की अच्छी वेंटिलेशन और सफाई का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।

2. फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए सबसे अच्छा आहार क्या है?

फेफड़ों की सेहत के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीजें सबसे बेहतर हैं। अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, संतरे, बेरीज, अखरोट, हल्दी और अदरक जैसी चीजें शामिल करें। ये सभी फेफड़ों में होने वाली सूजन को कम करने और उन्हें डिटॉक्सीफाई करने में मददगार हैं।

3. क्या व्यायाम करने से वास्तव में फेफड़े मजबूत होते हैं?

बिना किसी शक के, हां! नियमित व्यायाम करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। जब आप एक्सरसाइज करते हैं, तो फेफड़ों को अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी पड़ती है, जिससे उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यह एक तरह से आपके फेफड़ों के लिए वर्कआउट जैसा है जो उन्हें स्वस्थ और दुरुस्त रखता है।

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